
गाजीपुर ।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने शनिवार को गाजीपुर के लंका मैदान में आयोजित सभा में गौ रक्षा को लेकर बड़ा धार्मिक और राजनीतिक संदेश दिया। अपनी “गौ रक्षा यात्रा” के दौरान उन्होंने कहा कि जो नेता गौ माता की रक्षा नहीं करेगा, उसे वोट देना भी पाप का भागी बनना है। उनके इस बयान के बाद जिले में धार्मिक और राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सभा को संबोधित करते हुए शंकराचार्य ने कहा कि देश को आजाद हुए 78 वर्ष हो चुके हैं, लेकिन आज भी गौ माता सुरक्षित नहीं है, जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को कभी केवल पशु नहीं माना गया, बल्कि माता के रूप में पूजनीय स्थान दिया गया है। उनका आरोप था कि अंग्रेजों के शासनकाल में गाय को पशु श्रेणी में रखा गया और स्वतंत्रता के बाद भी व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ ।
उन्होंने मतदाताओं से अपील करते हुए कहा कि अब केवल सड़क, बिजली और पानी जैसे मुद्दों पर नहीं, बल्कि गौ माता की रक्षा के आधार पर भी मतदान होना चाहिए। शंकराचार्य ने कहा कि मतदाता के पास सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति होती है और जनता को यह तय करना चाहिए कि वह ऐसे नेताओं को समर्थन दे जो गौ रक्षा के पक्ष में खड़े हों ।
मीडिया से बातचीत के दौरान शंकराचार्य ने बताया कि उनकी गौ रक्षा यात्रा उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों तक पहुंचने का लक्ष्य लेकर निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि यात्रा की शुरुआत 3 मई को गोरखपुर से हुई थी और अब तक करीब 30 विधानसभा क्षेत्रों का दौरा किया जा चुका है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि जो भी व्यक्ति, संगठन या सरकार गौ रक्षा के लिए आगे आएगी, उसे उनका आशीर्वाद मिलेगा ।डिया से बातचीत के दौरान उन्होंने लोकतंत्र और वर्तमान राजनीति पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि चुनाव के बाद तोड़फोड़ कर सरकार बनाना जनता के जनादेश का अपमान है और इससे लोकतंत्र के प्रति लोगों का विश्वास कमजोर होता है। पश्चिम बंगाल की राजनीति और वहां सनातन विचारधारा की सरकार बनने की संभावना पर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि अभी इस विषय पर कुछ कहना जल्दबाजी होगी ।
सभा के अंत में उन्होंने लोगों से भावनात्मक अपील करते हुए कहा कि मतदान से पहले यह अवश्य विचार करें कि जिस प्रत्याशी को वोट दिया जा रहा है, वह गौ रक्षा के पक्ष में है या नहीं। उन्होंने कहा कि गौ रक्षकों का समर्थन करना पुण्य का कार्य है, जबकि गौ हत्या का समर्थन करने वालों या उस पर मौन रहने वालों को वोट देना पाप के समान है ।