इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आज पारिवारिक रिश्तों की नीलामी कर दी।
दिया और अंशु। दो लड़कियां। घर में पली-बढ़ी। बाप ने खून-पसीना एक करके पढ़ाया-लिखाया।
फिर एक दिन दोनों ने कहा “हमने इस्लाम कबूल कर लिया”।
बाप घबराया, समझाया, रोका। क्योंकि कोई भी बाप अपनी 20 साल की बेटी को रातों-रात “गायब” होते नहीं देख सकता।
बेटियां कोर्ट गईं। आरोप: “पापा ने घर में बंद कर दिया”।
कोर्ट ने मान लिया। सजा सुनाई: बाप दे ₹12.5 लाख। सरकार दे ₹12.5 लाख। कुल ₹25 लाख।